मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 लोगों की हत्या हुई थी — TRF, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा ने मिलकर हमला किया। जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया। 7 से 10 मई तक, 88 घंटे का जबरदस्त संघर्ष हुआ। भारतीय वायुसेना ने आसमान पर पूरी पकड़ बना ली, पाकिस्तान के ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचाया, और आखिरकार अमेरिकी दबाव में पाकिस्तान को सीजफायर की मांग करनी पड़ी। एक स्विस थिंक टैंक ने साफ-साफ कहा, भारतीय वायुसेना की बढ़त ने ही बाजी पलट दी।
अब, देखते हैं दुनिया के बड़े देशों ने इस सब पर क्या रुख अपनाया —
- अमेरिका (United States)
अमेरिका ने खुद को तटस्थ रखा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सीजफायर का ऐलान किया और बोले, “न्यूक्लियर जंग टल गई।” वाइस प्रेसिडेंट वेंस ने कूटनीति की बात की। अमेरिका ने पाकिस्तान पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगाया, भारत का आत्मरक्षा का अधिकार माना, लेकिन दोनों को सलाह दी कि मामले को ज्यादा न बढ़ाएं। - चीन (China)
चीन को भारत के हमले पसंद नहीं आए, उसने इन्हें “अफसोसनाक” बताया। पाकिस्तान का खास दोस्त है, तो साफ तौर पर बोला — हालात और न बिगाड़ो। आरोप लगे कि चीन ने पाकिस्तान को रीयल-टाइम मदद दी और AI से गलत जानकारी फैलाई। फिर भी, दोनों को “अटल पड़ोसी” कहकर खुद को बीच में लाने की कोशिश करता रहा। - रूस (Russia)
रूस ने खुलेआम आतंकवाद की निंदा की और भारत के साथ “अटूट” दोस्ती दोहराई। विदेश मंत्रालय ने सिमला समझौते की याद दिलाई। राष्ट्रपति पुतिन ने शांति की अपील की। ऑपरेशन के बाद, रूस ने भारतीय टीम का स्वागत भी किया और S-400 मिसाइलों की कामयाबी पर खुशी जताई। - ब्रिटेन (United Kingdom)
ब्रिटेन ने गहरी चिंता जताई और दोनों देशों से बातचीत करने को कहा। विदेश सचिव लैमी ने पहलगाम हमले की आलोचना की। कई सांसदों—जैसे प्रीति पटेल और बॉब ब्लैकमैन—ने भारत के जवाबी कदम का समर्थन किया। ब्रिटेन ने भारत की संयमित कार्रवाई की भी तारीफ की। - फ्रांस (France)
फ्रांस ने माना कि भारत को आतंकवाद से खुद को बचाने का हक है, लेकिन साथ ही कहा—मामले को और न बढ़ाओ। विदेश मंत्री बारोट ने नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया। बाद में फ्रांस ने आतंकवाद को ‘कैंसर’ बताया और भारत के पक्ष में खड़ा रहा। राफेल फाइटर जेट्स की भूमिका की भी जमकर तारीफ हुई। - जर्मनी (Germany)
जर्मनी ने पहलगाम हमले को लेकर सख्त बयान दिया और भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को सही ठहराया। विदेश मंत्री वाडेफुल ने जयशंकर से बात की और एकजुटता दिखाई। जर्मन राजदूत ने ऑपरेशन की सटीकता और तेजी की खास तौर पर सराहना की। - जापान (Japan)
जापान ने हमले की कड़ी निंदा की और ऑपरेशन को “राज्य-प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ जिम्मेदार जवाब” बताया। लेकिन, मुख्य कैबिनेट सचिव हायाशी ने भी चेतावनी दी—पूरी जंग की आशंका है, इसलिए मामला शांत करो। - सऊदी अरब (Saudi Arabia)
सऊदी अरब ने खुद को मध्यस्थ बनाया। मंत्री अदेल अल-जुबैर ने दोनों देशों का दौरा किया और बातचीत को बढ़ावा दिया। सऊदी ने कहा, क्षेत्रीय स्थिरता सबसे जरूरी है, और पाकिस्तान पर आतंकवाद की लागत बढ़ाने को सही बताया। - इजरायल (Israel)
इजरायल ने भारत का सबसे खुलकर समर्थन किया। राजदूत रेवेन अजहर ने साफ कहा, “आतंकवादियों के लिए कोई जगह नहीं।” प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी माना कि ऑपरेशन से ठीक पहले भारत को “battle-proven” हथियार दिए गए थे। - तुर्की (Turkey)
तुर्की ने भारत के हमलों को “उकसावा” बताया और पाकिस्तान का साथ दिया। राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तान के नेताओं से बात की। तुर्की पर आरोप लगे कि उसने पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई किए, जिससे भारत में तुर्की का विरोध शुरू हो गया।
बाकी देशों की प्रतिक्रिया
ऑस्ट्रेलिया ने भी दोनों को संयम रखने को कहा, और क्वाड के नजरिए से भारत की सीजफायर लीडरशिप की तारीफ की। ईरान ने “गंभीर चिंता” जताई और दोनों देशों का दौरा कर शांति की कोशिश की। बांग्लादेश ने कूटनीतिक हल की उम्मीद जताई।
नतीजा
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की “जीरो टॉलरेंस” नीति पूरी दुनिया के सामने आ गई। ज्यादातर पश्चिमी देशों और इजरायल ने भारत की कार्रवाई को जायज माना, लेकिन चीन और तुर्की जैसे पाकिस्तान के करीबी देशों ने आलोचना की। न्यूक्लियर खतरे की वजह से सबने संयम रखने की सलाह दी। इस जीत ने दक्षिण एशिया में deterrence का नया स्तर तय कर दिया, और पाकिस्तान पर आतंकवादी संगठनों को काबू में रखने का दबाव काफी बढ़ गया।
